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Monday, November 3, 2008

सपना और शुरुआत

स्व. वेणुगोपाल जी की ये पंक्तियाँ बहुत दिनों से दिमाग़ में गूँज रही थीं। सोचा आप सभी से बांटता चलूँ।

"न हो कुछ भी,
सिर्फ़ सपना हो,
तो भी हो सकती है शुरुआत।
और ये शुरुआत ही तो है,
कि वहाँ एक सपना है। "