Sunday, August 23, 2009

उल्लुओं से क्षमा याचना सहित...




एक पुरानी कहावत है कि 'जिस बाग़ में एक भी उल्लू डेरा डाल ले वो बाग़ सूख जाता है'। एक शेर अर्ज़ है -
बर्बाद गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफ़ी है,
हर शाख़ पे उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ताँ क्या होगा.

9 comments:

  1. सुन्दर लेखन बधाई

    गणेश उत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामना

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  2. सोचने पर मजबूर कर देनेवाली उमदा पोस्ट। वो भी माफ़ी के साथ।

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  3. एक यह भी पेशे खिदमत है -
    कद्रदानों की तबीयत का अजब रंग है आज
    बुलबुलों की ये हसरत के वे उल्लू न हुए

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  4. दिलचस्प प्रस्तुतिकरण... हैपी ब्लॉगिंग :)

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  5. Achha kiya jo apne pahle hi Ulluo se mafi maag li...nahi to bechare khafa ho jate apse...

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  6. “Religion is an insult to human dignity. With or without it, you'd have good people doing good things and evil people doing bad things, but for good people to do bad things, it takes religion.”

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  7. If one man suffers from delusion it is called insanity, If many people suffer from delusion it is called religion.

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  8. किसी भी अच्छाई का "ऑर्गेनाइजेशन या इन्स्टीट्यूशनलीकरण" उसे चुगद के कम्पीटीशन में ला पटकता है! :)

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